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जेसन मैक पांच साल की अवस्था तक बोलने में अक्षम थे। पिता ने जेसन का प्रवेश स्कूल में करा दिया। उन्हें लगा कि स्कूल जाने पर जेसन में कुछ बदलाव अवश्य आएंगे। यही हुआ भी। धीरे-धीरे जेसन ने बोलना सीख लिया। जेसन को बास्केट बॉल खेलने का शौक था। जब वह स्कूल में बास्केट बॉल खेलने वाली टीम को देखता तो उसे लगता कि एक दिन वह भी इस टीम में अवश्य खेलेगा। कुछ ही समय में जेसन को बास्केट बॉल से इतना लगाव हो गया कि वह घंटों कोर्ट के बाहर ही खड़ा रहता। उसकी लगन देख एक दिन टीम का छात्र बोला, 'तुम यहां खाली खड़े रहते हो, इससे तो बॉल उठाकर कोच को दे दिया करो, तुम्हें भी अच्छा लगेगा और अन्य खिलाड़ियों का समय भी बचेगा।' जेसन ने मुस्करा कर सहमति दे दी। इसके बाद वह बगल से बॉल उठाकर कोच को देने लगा। कभी-कभी उसे खेलने का मौका भी मिल जाता था। कोच ने जब यह जाना कि जेसन नियमित रूप से छह-छह घंटे कोर्ट में खड़ा रहता है तो उन्होंने उसे टीम का जूनियर कोच बना दिया। पर जेसन को तो खेलना पसंद था। एक दिन टीम के सीनियर कोच ने जेसन की इच्छा को देखते हुए उसे इंटर स्कूल चैंपियनशिप में आखिरी चार मिनट में खेलने का मौका दे दिया। जेसन को जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई। उन्होंने खेलना शुरू किया। उनका पहला शॉट साधारण था, वही हाल दूसरे का हुआ। लेकिन इसके बाद चमत्कार हुआ। उनके अगले छह शॉट हाफवे मार्क से तीन पाइंटर शॉट थे। यह सब खेल के आखिरी तीन मिनटों में हुआ, जिससे उनकी टीम मैच जीत गई। मैच जीतने की देर थी, इसके बाद तो जेसन एक राष्ट्रीय शख्सियत बन गए और जॉर्ज बुश तथा मैजिक जानसॅन जैसे व्यक्तित्व उनसे मिलने आए।

Source by NBT

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